रोजगार की तलाश में तजाकिस्तान गए 50 भारतीय बंधक बन गए हैं, जिसमें 28 गोरखपुर के हैं। भारतीय दूतावास से मदद न मिलने पर इन लोगों ने इंटरनेट मीडिया पर वीडियो प्रसारित कर भारत सरकार से मदद मांगी है। स्वजन को भी उन्होंने अपनी परेशानी बताई है।
इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो में देवी प्रसाद बता रहे हैं कि तजाकिस्तान की राजधानी दुशानबे से 100 किलोमीटर दूर एक कंपनी बर्फीले पहाड़ पर डैम बनवा रही है। डैम पर सुरंग खोदने का काम चल रहा है। कंपनी ने धोखाधड़ी कर उन लोगों को बुलाया है। यहां पर तापमान माइनस में है, खाना व पानी नहीं मिल रहा। काम के लिए कोई लाइसेंस भी नहीं बना है न ही इंश्योरेंस है। कंपनी की गाड़ी का नुकसान हो रहा है तो उसके रुपये वेतन से ही काटे जा रहे हैं। इसे लेकर भारतीय दूतावास से अधिकारियों से वार्ता की गई थी। अधिकारी आए थे और जल्द से जल्द भारत भेजने की बात कहे थे।
दूतावास के अधिकारियों के सामने कंपनी का एचआर भी भारत भेजने की बात कहा था, लेकिन 10 दिन से अधिक का समय बीत गया अब तक कोई पहल नहीं की गई है। अधिकारी केवल बंधक बने लोगों की सूची मांगते हैं। गोरखपुर, दिल्ली व बिहार के एजेंट ने एक से डेढ़ लाख रुपये लेकर उन्हें भेजा है। पिछले 15 दिन में वह लोग 10 से अधिक वीडियो स्वजन को भेजने के साथ ही इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर चुके हैं।



