हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में भारतीय भाषाओं में पुस्तक लेखन हेतु शिक्षकों की क्षमता विकास कार्यशाला का समापन
श्रीनगर गढ़वाल
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के एकेडमिक एक्टिविटी सेंटर, चौरास परिसर में भारतीय भाषाओं में पुस्तक लेखन हेतु शिक्षकों की क्षमता विकास पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का आज समापन हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय एवं शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की भारतीय भाषा समिति के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र का शुभारंभ डॉ. चंदन श्रीवास्तव, एकेडमिक कोऑर्डिनेटर, डॉ. अलका सूरी, स्टेट कोऑर्डिनेटर तथा डॉ. आलोक सागर गौतम, कोऑर्डिनेटर द्वारा किया गया। इस सत्र में विभिन्न विषयों के शिक्षाविदों एवं प्रतिभागियों ने अपने-अपने विषयों के अनुरूप समूह बनाकर पावरपॉइंट प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय भाषाओं में पुस्तक लेखन की संभावनाओं, आवश्यकताओं एवं अवसरों पर चर्चा की। समूह प्रस्तुतियों का प्रमुख केंद्र विषय मानचित्रण (Subject Mapping) एवं संस्थान मानचित्रण (Institution Mapping) रहा। प्रतिभागियों ने पुस्तक लेखन के लिए विषयों की पहचान, उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों तथा संस्थागत सहयोग की संभावनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
भारतीय भाषा समिति से जुड़े कोऑर्डिनेटर डॉ. अलका सूरी, डॉ. आलोक सागर गौतम एवं डॉ. चंदन श्रीवास्तव के साथ डॉ. रचना विश्वकर्मा, डॉ. सुधांशु भूषण तथा प्रोफेसर नारायण दत्त ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों एवं विचारों को सुना। उन्होंने प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण सुझाव एवं फीडबैक प्रदान किया तथा भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक साहित्य के सृजन की दिशा में सामूहिक प्रयासों के महत्व पर बल दिया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में समापन समारोह (Valedictory Session) का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर वाई. पी. रैवानी, माननीय कुलसचिव, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, डॉ रचना विश्वकर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों का स्वागत डॉ. आलोक सागर गौतम ने किया।
मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों ने विश्वविद्यालय में निरंतर आयोजित हो रही शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने भारतीय भाषाओं में शैक्षणिक पुस्तकों के लेखन एवं प्रकाशन को प्रोत्साहित करने के लिए इस प्रकार की कार्यशालाओं को महत्वपूर्ण बताया। समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. आलोक सागर गौतम, कोऑर्डिनेटर ने कार्यशाला के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले विश्वविद्यालय के सभी संबंधित हितधारकों (Stakeholders) तथा भारतीय भाषा समिति के समन्वयकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में भारतीय भाषाओं में पुस्तक लेखन हेतु शिक्षकों की क्षमता विकास कार्यशाला का समापन
श्रीनगर गढ़वाल, 16 अक्टूबर 2026। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के एकेडमिक एक्टिविटी सेंटर, चौरास परिसर में भारतीय भाषाओं में पुस्तक लेखन हेतु शिक्षकों की क्षमता विकास पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का आज समापन हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय एवं शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की भारतीय भाषा समिति के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र का शुभारंभ डॉ. चंदन श्रीवास्तव, एकेडमिक कोऑर्डिनेटर, डॉ. अलका सूरी, स्टेट कोऑर्डिनेटर तथा डॉ. आलोक सागर गौतम, कोऑर्डिनेटर द्वारा किया गया। इस सत्र में विभिन्न विषयों के शिक्षाविदों एवं प्रतिभागियों ने अपने-अपने विषयों के अनुरूप समूह बनाकर पावरपॉइंट प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय भाषाओं में पुस्तक लेखन की संभावनाओं, आवश्यकताओं एवं अवसरों पर चर्चा की। समूह प्रस्तुतियों का प्रमुख केंद्र विषय मानचित्रण (Subject Mapping) एवं संस्थान मानचित्रण (Institution Mapping) रहा। प्रतिभागियों ने पुस्तक लेखन के लिए विषयों की पहचान, उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों तथा संस्थागत सहयोग की संभावनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
भारतीय भाषा समिति से जुड़े कोऑर्डिनेटर डॉ. अलका सूरी, डॉ. आलोक सागर गौतम एवं डॉ. चंदन श्रीवास्तव के साथ डॉ. रचना विश्वकर्मा, डॉ. सुधांशु भूषण तथा प्रोफेसर नारायण दत्त ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों एवं विचारों को सुना। उन्होंने प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण सुझाव एवं फीडबैक प्रदान किया तथा भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक साहित्य के सृजन की दिशा में सामूहिक प्रयासों के महत्व पर बल दिया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में समापन समारोह (Valedictory Session) का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर वाई. पी. रैवानी, माननीय कुलसचिव, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, डॉ रचना विश्वकर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों का स्वागत डॉ. आलोक सागर गौतम ने किया।
मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों ने विश्वविद्यालय में निरंतर आयोजित हो रही शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने भारतीय भाषाओं में शैक्षणिक पुस्तकों के लेखन एवं प्रकाशन को प्रोत्साहित करने के लिए इस प्रकार की कार्यशालाओं को महत्वपूर्ण बताया। समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. आलोक सागर गौतम, कोऑर्डिनेटर ने कार्यशाला के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले विश्वविद्यालय के सभी संबंधित हितधारकों (Stakeholders) तथा भारतीय भाषा समिति के समन्वयकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का कुशलतापूर्वक संचालन एवं सभी सत्रों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य दर्शनशास्त्र विभाग की प्रो. कविता भट्ट द्वारा किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के मुख्य प्रॉक्टर प्रोफेसर दीपक कुमार की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।


